थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों पर ग्वालियर हाईकोर्ट ने लगाया 5 लाख का जुर्माना

बहोड़ापुर थाना पुलिस ने एक निर्दोष को गिरफ्तार कर अखबारों में छपवाए थे उसके फोटो। तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस को दिए एफआईआर के आदेश।

राजेंद्र तलेगांवकर। मध्‍य प्रदेश उच्‍च न्‍यायालय खंडपीठ ग्‍वालियर (MP High Court Bench Gwalior) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पुलिस पर 5,00,000 रुपए का जुर्माना ही नहीं लगाया है, बल्कि थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश भी लोकायुक्त पुलिस (MP Lokayukt Police) को दिए हैं। इन पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों ने अवैध रूप से एक दुकान को न केवल खाली कराया था, बल्कि पीड़ित किराएदार को इनामी बदमाश बताकर उसका फोटो भी अखबारों में छपवा दिया था।

ग्‍वालियर हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश राजपूत, सब इंस्पेक्टर संजीता मिंज, आरक्षक अचल शर्मा से राशि वसूल कर पीड़ित को उसकी सामाजिक छवि खराब करने पर क्षतिपूर्ति के रूप में दिलाई जाए। वहीं, पीड़ित को अलग से 20,000 रुपए हर्जाने के रूप में भी दिलाए जाएंगे। तीनों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस को एफआईआर दर्ज कर 15 दिन में न्यायालय को सूचित करना होगा।

लक्ष्मण तलैया निवासी अरुण शर्मा ने एडवोकेट सुरेश अग्रवाल के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की थी जिस पर न्यायालय ने तीन अधिवक्ताओं को पीड़ित को मुआवजा दिलाने के लिए राशि तय करने के लिए कहा था। न्यायालय का यह आदेश उन पुलिस अधिकारियों के लिए एक सबक है जो कानून को ठेंगा दिखाते हुए अपना कानून चलाते हैं। लोकायुक्त पुलिस द्वारा थाना प्रभारी एवं पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ पद का दुरुपयोग करने के मामले में एफआइआर दर्ज की जाएगी।

यह है मामला

बहोड़ापुर थाना पुलिस ने लक्ष्मण तलैया निवासी अरुण शर्मा को 14 अगस्त 2020 को 5000 रुपए का इनामी बदमाश बताते हुए मीडिया के सामने पेश किया था। इसके बाद पीड़ित के फोटो अखबारों में प्रकाशित हुए थे एवं सोशल मीडिया तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी उसके वीडियो को चलाया गया था। पीड़ित की ओर से जब इसकी शिकायत एसपी से की गई और इस मामले की जांच में पाया गया कि पीड़ित को पुलिस ने गलत गिरफ्तार किया था। इस पर थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया था। हाईकोर्ट के निर्देश पर न्‍यायालय में हाजिर होकर एसपी ग्वालियर ने यह स्वीकार किया था कि पुलिस ने पीड़ित को गलत गिरफ्तार किया था। एसपी ने यह भी स्वीकार किया था कि लाइन अटैच करना सजा नहीं है।

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