ग्वालियर में साझा प्रयासों से लाएंगे विश्व स्तरीय चिकित्सा सेवाएं : ज्योतिरादित्य सिंधिया

ग्वालियर की चिकित्सा सेवाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से सोमवार को सिंधिया ने सरकारी एवं निजी चिकित्सकों से की परिचर्चा।

द ग्वालियर। समाज में शिक्षक व चिकित्सक का ओहदा बहुत ऊंचा होता है। शिक्षक ज्ञानदाता और चिकित्सक जानदाता (जान बचाने वाले) होते हैं। चिकित्सकगण अपनी असली पहचान को याद रखकर आम जनता को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएं। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर की चिकित्सा सेवाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से सोमवार को सरकारी एवं निजी चिकित्सकों से परिचर्चा की। उन्होंने कहा सभी के साझा प्रयासों से ग्वालियर में विश्व स्तर की चिकित्सा सेवाएं लानी है। इसमें चिकित्सकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। इस परिचर्चा के दौरान प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी मौजूद थे।

ग्‍वालियर के गजराराजा मेडीकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में चिकित्सकों के साथ हुए संवाद के दौरान राज्यसभा सांसद ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने कहा कि ग्वालियर में चिकित्सा सेवाओं को विस्तार देने की जरूरत है। यह हम सबके सम्मिलित प्रयासों से संभव होगा। चिकित्सक और जनप्रतिनिधि एक ही सिक्के के दो पहलू की तरह होते हैं। दोनों का लक्ष्य जनसेवा करना भी समान है। इस ध्येय का ध्यान रखकर अगर हम काम करेंगे, तभी सही मायने में जनता की तकलीफ दूर कर पाएंगे। उन्होंने चिकित्सकों का आह्वान करते हुए कहा कि वे समर्पण भाव से जनता को स्वास्थ्य स्वाएं मुहैया कराएं। उनकी समस्याओं का समाधान कराना हमारी जिम्मेदारी है। सिंधिया ने कोरोना काल में बेहतर सेवाएं मुहैया कराने के लिए सभी चिकित्सकों के प्रति साधुवाद व्यक्त किया।

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ग्वालियर की स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया आगे आए हैं। हम सभी को इस पुनीत पहल में सहभागी बनना है। उन्‍होंने कहा कि चिकित्सकों को दूसरा भगवान कहा जाता है। चिकित्सकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए हम ग्वालियर की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाएंगे। 

विशेषज्ञों की कमेटी बनाएं

राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने परिचर्चा के दौरान सुझाव दिया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक कमेटी बनाई जाए। इस कमेटी द्वारा दिए गए सुझावों का हम समाधान कराएंगे। उन्होंने कहा सिंधिया रियासतकाल के दौरान शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा दिया गया। हम इसी भाव के साथ ग्वालियर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार दिलाने के प्रयास करेंगे। इस अवसर पर उन्होंने गोले के मंदिर के समीप स्थित मार्क अस्पताल की जमीन पर अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से युक्त अस्पताल की स्थापना की पहल को आगे बढ़ाने की बात भी कही।

विभिन्न चिकित्सकों ने दिए सुझाव

परिचर्चा की शुरूआत गजराराजा मेडीकल कॉलेज के डीन डॉ. एसएन अयंगर ने स्वागत उद्बोधन से की। इसके बाद चिकित्सकों ने अपने सुझाव व समस्याएं सामने रखीं। डॉ. पुरेन्द्र भसीन ने प्रिएन्टिव मेडीसन को बढ़ावा देने एवं हेल्थ इंश्योरेंस का दायरा बढ़ाने का सुझाव दिया। डॉ. ए.एस. भल्ला, डॉ. एस.आर. अग्रवाल व डॉ. सुभाष ढोंड़े ने नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से संबंधित नर्सिंग होम की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया। डॉ. राहुल सप्रा ने डॉक्टर प्रोटेक्शन एक्ट की मजबूती और नर्सिंग होम को लघु उद्योग का दर्जा दिलाने का सुझाव दिया। डॉ. कुसुमलता सिंघल ने निजी हॉस्पिटल खोलने की अनुमति देने में विशेषज्ञ चिकित्सा का ध्यान रखने और आईएमए हाउस बनाने में सहयोग देने का सुझाव दिया। डॉ. सुनील अग्रवाल ने पैरीफेरी अस्पतालों की सेवाओं को बेहतर बनाने का सुझाव दिया, जिससे मेडीकल कॉलेज के अस्पताल में केवल रेफरल मरीज ही आएं। उन्होंने चिकित्सकों को विदेश अध्ययन की सुविधा दिलाने का सुझाव भी दिया। डॉ. शैलेन्द्र भदौरिया ने ग्वालियर में जीडियाटिक मेडीसन (बुजुर्गों से संबंधित इलाज) सेंटर खोलने का सुझाव दिया। इनके अलावा जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की सचिव डॉ. अंकिता त्रिपाठी सहित अन्य चिकित्सकों ने भी सुझाव दिए। परिचर्चा में पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन प्रवीण अग्रवाल ने किया। 

हाथियों पर बिठाकर निकाली थी चिकित्सकों के पहले बैच की शोभायात्रा 

चिकित्सकों के साथ हुई परिचर्चा में डॉ. जे.एस. नामधारी ने जानकारी दी कि ग्वालियर में लगभग 122 वर्ष पहले सिंधिया रियासतकाल के दौरान चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल हुई। सन् 1899 में माधव महाराज प्रथम के दौरान जेएएच का शुभारंभ हुआ। सन् 1936 में कमलाराजा अस्पताल का भूमिपूजन हुआ। सन् 1945 में ग्वालियर में मेडीकल कॉलेज खोलने की घोषणा हुई। एक अगस्त 1946 को एमबीबीएस डॉक्टर्स का पहला बैच शुरू हुआ। जब पहला बैच अपनी पढ़ाई करके चिकित्सक बनकर निकला तब सभी चिकित्सकों को तत्कालीन महाराज जीवाजीराव सिंधिया ने हाथी पर बिठाकर पूरे शहर में शोभा यात्रा निकाली। ग्वालियर का मेडीकल कॉलेज उस समय प्रदेश का पहला एवं देश का 17वाँ मेडीकल कॉलेज था। जीआर मेडीकल कॉलेज के 8 चिकित्सकों को पद्मश्री मिला। ग्वालियर के जेएएच में प्रदेश में सबसे पहले किडनी रोगियों के लिए डायलिसिस की सुविधा शुरू हुई। राजमाता स्व. विजयाराजे सिंधिया ने अस्पताल को डायलिसिस मशीन दान में दी थी।

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