पैनल लॉयर की नियुक्ति पर सवाल! हाईकोर्ट का सुझाव, शासन पैनल लॉयर को प्रशिक्षित कर परीक्षा लेकर ही करे नियुक्ति

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर ने कहा, बिना तैयारी किए न्यायालय में आ रहे पैनल लॉयरों के कारण काम हो रहा है बाधित। एमएलसी तक नहीं पढ़ पा रहे।

द ग्वालियर। हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court Gwalior) ने पैनल लॉयर की नियुक्ति पर सवाल खड़े करते हुए शासन (Madhya Pradesh Government) को सुझाव दिया है कि उच्च न्यायालय में ऐसे अधिवक्ताओं (Advocate) की नियुक्ति से पहले उन्हें ट्रेनिंग दी जाए एवं ट्रेनिंग के बाद उनकी परीक्षा भी ली जाए।

परीक्षा में सफल होने वाले अधिवक्ताओं को ही उच्च न्यायालय में पैरवी के लिए भेजा जाए। न्यायमूर्ति शील नागू (Justice Sheel Nagu) ने मारपीट के एक मामले में सुरेश सिंह तोमर द्वारा प्रस्तुत अग्रिम जमानत के आवेदन को स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति शील नागू ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से लगातार यह देखा जा रहा है कि शासन का पक्ष रखने के लिए आ रहे पैनल लॉयर न्यायालय के समक्ष ठीक प्रकार से पैरवी नहीं कर पा रहे हैं। अधिवक्ता एमएलसी को भी नहीं पढ़ पा रहे हैं। जमानतों के मामले में यह देखा जा रहा है कि पैनल लॉयर तैयारी ही नहीं रहते हैं। यह लॉयर आमतौर पर हाईकोर्ट द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब भी नहीं दे पाते हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे में जबकि न्यायालय के समक्ष काफी संख्या में प्रकरण लिस्टेड होते हैं तब न्यायालय यह उम्मीद करता है कि शासन की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता पूरी तैयारी के साथ आएं। न्यायालय ने यह भी कहा कि हमें यह नहीं पता कि जो अधिवक्ता पैरवी के लिए आ रहे हैं उन्हें कोई अनुभव है या नहीं। इन पैनल लॉयर ने कोई प्रैक्टिस की है या नहीं। ऐसा अनुभव हो रहा है कि जिन अधिवक्ताओं को पैनल लॉयर के रूप में नियुक्त किया जा रहा है उनके पास अनुभव की कमी है। न्यायालय ने कहा कि अधिवक्ताओं की नियुक्ति को लेकर हमें हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। जब यह पैनल लॉयर राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए उपस्थित होते हैं तो वे उस प्रकार का सहयोग नहीं कर पा रहे हैं जैसा कि उन्हें करना चाहिए। इससे न्यायालय के कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है।

उम्मीद के साथ दी जाती है सलाह

न्यायालय ने कहा कि प्रदेश के महाधिवक्ता एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता को इस उम्मीद के साथ सलाह दे रहे हैं कि पैनल लॉयर की नियुक्ति के पहले उन्हें प्रशिक्षित किया जाए। प्रशिक्षण के बाद उनका टेस्ट भी लिया जाना चाहिए जिस में सफल होने पर उन्हें पैरवी के लिए भेजा जाना चाहिए। इससे न्याय की गति बढ़ेगी और पैनल लॉयर की सहयोग की क्षमता भी बढ़ेगी।

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