दुकान पर बिक रहें थे शेर, हिरण, भालू और उल्लू के अंग, तंत्र साधना में होता हैं उपयोग, फॉरेस्ट और STF ने छापा मारकर किया गौरखधंधे का पर्दाफाश

द ग्‍वालियर। क्‍या आपने सुना है कि किसी आयुर्वेदिक दवाईयों की दुकान पर शेर, हिरण, भालू और उल्‍लू के अगर अंग भी बेचे जाते है, लेकिन मप्र के ग्‍वालियर शहर में कुछ यही चौंका देने वाला खुलासा हुआ है। ग्‍वालियर के मुरार इलाके में करीब सौ साल पुरानी फैमस भूरा पंसारी की दुकान से करोड़ों की कीमत के शेड्यूल वन्‍य प्राणियों के अवशेष हाथ लगे हैं। फॉरेस्‍ट विभाग और पुलिस की स्‍पेशल टास्‍क फोर्स ने इस पूरे गौरखधंधे का पर्दाफाश किया है। छापा मारने से पहले टीम ने जाल बिछाया। टीम के सदस्‍य खुद ग्राहक बनकर पंहुचे और वहां वन्‍य प्राणियों के अंगो को उंचे दामों में चोरी छुपे बेचा जा रहा था। बताया जाता है कि वन्‍य प्राणियों के अंग तंत्र साधना में उपयोग किए जाते है। लिहाजा संभावना है कि वन्‍य प्राणियों के इन अंगों को तांत्रिकों को बेचा जाता हो। इस मामले में दुकान को सील्‍ड कर तीन लोगों को गिरफ़तार किया गया है। माना जा रहा है कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान वन्‍य प्राणियों के अंगों की तस्‍करी करने वाले बडे गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है।

वन्‍य प्राणियों के अंग देख दंग रह गई टीम

ग्वालियर एसडीओ राजीव कौशल ने बताया कि एसटीएफ को खबर मिल रही थी कि भूरा पंसारी की दुकान पर काफी दिनों से वन्‍य  प्राणियों के अंग बिक्री हो रही है। इस अवैध कारोबार की खबर मिलते ही ग्वालियर वन मंडल के डीएफओ अभिनव पल्लव के निर्देशन में ग्वालियर वन क्षेत्र का स्टाफ और उड़नदस्ता ने गुरुवार की दोपहर को  भूरा पंसारी की दुकान पर पहुंच कर संयुक्त कार्रवाई की। मुरार के सदर बाजार में गिरराज जी मंदिर के सामने स्थित यह दुकान लगभग 150 साल पुरानी हैं। इसी दुकान पर एसटीएफ की टीम ग्राहक बनकर पंहुचा। वन्‍य  प्राणियों के संबंधित सामान जब उन्‍हे यहां मिला तो सभी दंग रह गए। असल में शेड्यूल वन के वन्‍य प्राणी टाईगर, हिरण, भालू, उल्लू और सी फैन आदि के अवशेष बड़ी भारी मात्रा में यहां मौजूद मिले। जबकि उक्त सामान की खरीद व बिक्री दोनों ही प्रतिबंध है। साथ ही कोई भी अनजान व्यक्ति भी यह सामान को अपने घरों पर भी नहीं रह सकता।

हो सकता है बडा रैकेट का खुलासा

पड़ताल की जा रही है कि भूरा पंसारी की दुकान पर यह सामान आखिर कहां से और किसके माध्यम से लाया  जाता था। यह सामान किस-किस को बेचा गया इसकी भी पडताल की जा रही है। माना जा रहा है कि इन सवालों के जवाब मिलने पर वन्‍य प्राणियों के अंगों की तस्‍करी करने वाले बडे रैकेट का खुलासा हो सकता है। वहीं ग्वालियर वन मंडल के अधिकारी भी सकते में हैं कि यह सामान कब से बेचा जा रहा था और कहां से मंगाया जा रहा था। संभावना जताई जा रही है कि अन्य प्रांतों के लोगों से तार मिले हुए। क्योंकि हिमालय पर पाए जाने वाला हिमालय ताल जो कि एक हिरण की दुर्लभ प्रजाति है उसका भी सामान मिला है। इसी तरह दक्षिण मैं समुद्री सी फैन भी मिला है।  उक्त युक्त जीव भी दुर्लभ प्राणी हैं।

ये सामान मिला मौके पर

जब टीम ने छापामार कार्रवाई की तो मौके पर शेर के दांत , गीदड़ सिंगी, उल्लू के नाखून, कस्तूरी, हिरण के पंजे, समुद्री सी फैन, हिमालय ताल, हिरण के सींग के अलावा अन्य सामान भी मिला। लगभग 8 दुर्लभ वन्यजीवों के अलग-अलग अंग मौके से मिले हैं।

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