मोदी सरकार के श्रम कानून खत्मह कर बनाई संहिता का विरोध, लेबर बार एसोसिएशन ने कहा ये श्रमिकों के हितों के खिलाफ है

द ग्वालियर। केंद्र सरकार द्वारा मौजूदा 29 श्रम कानूनों को खत्‍म कर चार नई श्रमिक संहिता बनाई हैं। यह संहिता श्रमिकों के हितों के खिलाफ है। यह बात लेबर बार एसोसिएशन के सचिव सुबोध प्रधान ने ग्‍वालियर में लेबर बार एसोसिएशन एवं श्रमिक संगठनों की बैठक में कही। श्रम न्‍यायालय परिसर मो‍ती महल में आयोजित इस बैठक में श्री प्रधान ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा है कि उक्त संहिता के लागू होने से मध्यप्रदेश में मौजूद 26 श्रम न्यायालय समाप्त हो जाएंगे। श्रमिकों को शीघ्र सरल एवं सुलभ न्याय से वंचित होना पड़ेगा।

लेबर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भगवान सिंह बैस ने अपने विचार रखते हुए कहा कि श्रम न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को श्रम विभाग को देने की कार्यवाही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 50 के विपरीत है, क्योंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 50 में यह व्यवस्था दी गई है कि न्यायपालिका एवं कार्यपालिका को प्रथक प्रथक रखा जावे।

बैठक को सीटू यूनियन के उपाध्यक्ष अखिलेश यादव एवं इंटक के अध्यक्ष  रतीराम यादव ने संबोधित कर नये श्रम कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन की जरूरत पर जोर दिया।  ऑल इंडिया लायर्स यूनियन के प्रांतीय सचिव रविन्द्र सरवटे, संयुक्त सचिव सुरेश कुशवाह ने संबोधित कर समर्थन दिया।

सभा के अंत में लेबर बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष जे एस सेंगर ने उपस्थित अभिभाषक एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया एवं किसान आंदोलन के चलते शहीद हुए किसान साथियों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 2 मिनट का मौन रखा गया।

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