अवैध तलघरों पर कार्यवाही में लापरवाही, सिटी प्लानर, भवन अधिकारी सहित समस्त 25 क्षेत्राधिकारियों के विरुद्ध बैठार्ई जांच

हरीश चंद्रा, द ग्वालियर। शहर में अवैध तलघरों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में हाईकोर्ट के डंडे के बाद नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन ने समस्त भवन अधिकारी व 25 क्षेत्राधिकारियों (जेडओ) सह भवन निरीक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच(डीई) बैठा दी है। भवन शाखा के समस्त अधिकारियों को अवैध तलघरों के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने का आरोपी माना है। जांच का जिम्मा अपर आयुक्त आरके श्रीवास्तव को सौंपा है जबकि सब इंजीनियर अभिनव तिवारी को प्रस्तुतकर्ता नियुक्त किया है। निगम में भवन शाखा में अब तक की यह सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। निगमायुक्त माकिन ने हालांकि इस आदेश पर १६ अक्टूबर को हस्ताक्षर किए लेकिन गुरूवार को यह कार्यालय से बाहर आ सका। आदेश से समस्त क्षेत्राधिकारियों में आक्रोश है क्योंकि अवैध तलघरों की सूची तीन साल पहले बनी थी, तब वर्तमान में पदस्थ अधिकारी इंजीनियर क्षेत्राधिकारी नहीं थे।


इन अधिकारियों के विरुद्द बैठाई विभागीय जांच

भवन अधिकारी प्रदीप वर्मा पर वर्तमान में जोन क्रमांक १५,१६ तथा १९ के साथ साथ सिटी प्लानर का भी प्रभार है। इसलिए निगमायुक्त ने उनके खिलाफ भी विभागीय जांच के शुरू की है। इसके अलावा भवन अधिकारी राजू गोयल, पवन शर्मा, राकेश कश्यप, ब्रजकिशोर त्यागी, अजय शाक्यवार तथा वेदप्रकाश निरंजन शामिल है। जोन क्रमांक 1 के क्षेत्राधिकारी सह भवन निरीक्षक यशवंत मैकले, 2 के कार्तिक पटेल, 3 के राजेश परिहार, 4 के अशोक गुप्ता, 5 के रामसेवक शाक्य, 6 के राजू गोयल, 7 के मनीष यादव, 8 के अजय शर्मा, 9 के राजीव पांडे, 10 के महेन्द्र अग्रवाल, 11 के आशीष राजपूत, 12 के सत्येन्द्र सोलंकी, 13 के अमित गुप्ता, 14 के मनीष कन्नोजिया, 15 के वेदप्रकाश निरंजन, 16 के राजेन्द्र शर्मा, 17 के राकेश कश्यप, 18 के राकेश कुशवाह, 19 के राजीव सोनी, 20 के वीरेन्द्र शाक्य, 21 के उप्पल सिंह भदौरिया, 22 के रवि गोडिया, 23 के संदीप श्रीवास्तव, 24 के राजीव सिंघल तथा जोन क्रमांक 25 के क्षेत्राधिकारी बृजबिहारी चंसोलिया के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। निगमायुक्त माकिन ने इस आदेश पर १६ अक्टूबर को हस्ताक्षर किए लेकिन गुरुवार को यह बाहर आ सका। इस आदेश से क्षेत्राधिकारियों में आक्रोश है लेकिन डर के कारण वे विरोध करने की स्थिति में नही हैं।

जनहित याचिका पर हाई कोर्ट की सख्ती शहर में अवैध तलघर बने हैं। इनमें पार्किंग की जगह व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। वाहन सड़क पर खड़े होते हैं जिससे जाम लगता है। मदन कुशवाह ने अवैध तलघरों के खिलाफ 2016 में जनहित याचिका दायर की थी। निगम ने 948 अवैध तलघरों की सूची अदालत में प्रस्तुत की थी। इस मामले में हाई कोर्ट सख्त है। हाई कोर्ट ने अवैध तलघरों पर कार्रवाई के साथ साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों के नाम और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी तलब की थी। इसे देखते हुए निगमायुक्त ने यह कार्रवाई की है। जारी आदेश में कहा है कि संबंधित भवन निरीक्षक व भवन अधिकारियों ने अवैध तलघरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की है।

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