जेयू में भर्ती घोटाला : सीआईडी 8 सप्ताह में जांच करें पूरी 4 साल में पूरी नहीं कर सकी सीआईडी जांच

द ग्वालियर। हाईकोर्ट ने सीआईडी को आदेश दिया है कि जीवाजी विश्वविद्यालय में 9 साल पहले नियम विरुद्ध की गई 17 शिक्षकों की भर्ती की जांच 8 सप्ताह में पूरी किए जाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि इस मामले में नियमानुसार कार्यवाही करें।

न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी एवं न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा तत्कालीन कार्य परिषद सदस्य राजेंद्र सिंह यादव की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता यादव ने 22 अगस्त 2016 को सीआईडी को जीवाजी विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती घोटाले की जांच के लिए तथ्यों सहित शिकायत की थी। सीआईडी ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू तो की लेकिन अब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं की ।

यह है मामला

जीवाजी विश्वविद्यालय में वर्ष 2011 से 2013 के बीच नियमों को अनदेखा कर 17 शिक्षकों डॉ महेंद्र गुप्ता, डॉ हरेंद्र शर्मा, डॉ सुशील मंडेलिया, डॉ एस पटेल, डॉ निमिषा जादौन, डॉ सुमन जैन, डॉ मुकुल कुमार तेलंग, डॉ संजय कुलश्रेष्ठ, डॉ गणेश दुबे, डॉ गोपाल कृष्ण शर्मा, डॉ जनार्दन कुमार तिवारी, डॉ रामशंकर, डॉॅ सुविज्ञा अवस्थी, डॉ स्वर्णा परमार, डॉ मनोज शर्मा, डॉ रश्मि दाहिमा, डॉ नवनीत गरुड की नियुक्ति की गई। यह नियुक्तियां विधि विभाग में 5, फार्मेसी में 5, बॉटनी में 3, मेनेजमेंट में 2 तथा अन्य विभागों में की गई थी। अवैध रूप से हुई नियुक्तियों की शिकायत के बाद भी जब कोई जांच नहीं हुई तब इस मामले को विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने उठाया गया। कार्यपरिषद ने इस मामले की जांच सीआईडी से कराए जाने का प्रस्ताव पारित कर मामले को सीआईडी को भेजा । सीआईडी द्वारा जांच नहीं किए जाने पर अपील कर्ता यादव ने इस मामले की नियमानुसार जांच कराए जाने की मांग को लेकर याचिका प्रस्तुत की थी, एकल पीठ ने यादव की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि वे लोकायुक्त पुलिस को मामले की शिकायत कर सकते हैं। यादव ने इस आदेश के खिलाफ यह कहते हुए अपील प्रस्तुत की गई की जब इस मामले की जांच सीआईडी के पास लंबित है तो दूसरी जांच एजेंसी को शिकायत नहीं की जा सकती। युगल पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद सीआईडी को 8 सप्ताह में जांच पूरी करने के निर्देश दिया है।

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