पंचकल्याण महोत्सव का शुभारंभ, मंगल कलश घटयात्रा में उमड़ा जैन समाज

ग्‍वालियर के फूलबाग मैदान को पांच दिवसीय महोत्सव के लिए अयोध्या नगरी के रूप में सजाया गया है।  

द ग्वालियर। राष्ट्रसंत मुनिश्री 108 विहर्ष सागर महाराज एवं विजयेश सागर महाराज के सानिध्य में सोमवार से पांच दिवसीय पंच कल्याणक महोत्सव की शुरूआत हो गई है। 22 फरवरी से 27 फरवरी तक इस आयोजन के लिए फूलबाग मैदान को अयोध्या नगरी के रूप में सजाया गया है। पहले दिन प्रवचन से पूर्व विहर्ष पंचकल्याणक समिति व समन्वयक जैन मिलन ग्वालियर की ओर से नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला से आयोजन स्थल तक विशाल मंगल कलश घटयात्रा निकाली गई।  

हाथी, घोड़े के साथ निकली घटयात्रा   

नई सड़क से शुरू होकर शोभायात्रा गस्त का ताजिया, फालका बाजार, शिंदे की छावनी, चिड़ियाघर होते आयोजन स्थल अयोध्या नगरी फूलबाग मैदान पहुंची। शोभायात्रा में सबसे आगे घोड़े पर जैन ध्वजा लेकर व हाथी पर सौधर्म इंद्रा जैनध्वजा लेकर युवा चल रहे थे। इंद्र-इंद्राणिया 21 बग्घियों में सवार थे। महिलाएं केसरिया साड़ियों में मंगल कलश सिर पर रखकर व मंगल गीत गाकर चल रही थी।  महिला सगंठनो ने पूरे रास्ते डांडिया, गरबा करती हुई चल रही थीं। ढोल ताशे के साथ तीनों रथो में भगवान जिनेंद्र की प्रतिमाएं विराजित थी। जैन समाज के लोगो ने अपने घर के द्वारे पर भव्य रंगोली बनाकर रथ की आगवानी के साथ मुनिश्री विहर्ष सागर एवं मुनि विजयेश सागर महाराज के पादप्रक्षालन व भगवान जिनेद्र की भव्य आरती उतारी।

ध्वजारोहण के साथ के साथ हुआ शुभारंभ

पंचकल्याण महोत्सव का शुभारंभ मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज के  सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य अजित कुमार शास्त्री एवं सह प्रतिष्ठाचार्य चंद्रप्रकाश जैन ने मंत्र उच्चारण के साथ शुभारंभ किया। पंच कल्याणक महोत्सव में इंद्रों ने भगवान के अभिषेक एवं शांतिधार की। महिलाओं ने मंगल कलशों के जल से पांडाल और वेदी शुद्धि की क्रिया जैन विधि के अनुसार कराई। इसके बाद इंद्रा-इंदाणियों ने योगमंडल आराधना पूजन की। तीर्थंकर भगवान के गर्भ मे आने से पहले ही पृथ्वी पर शुभ लक्षण दिखाई देने लगते है। ठीक इसी तरह भगवान आदिनाथ की माता मरूदेवी को 16 सपने दिखाई दिए। जिन्होंने आभास कराया कि आने वाले समय मे उनके गर्भ से तीर्थंकर पैदा होगा। पंच कल्याणक पहले दिन सोमवार की रात सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर यह दृश्य प्रस्तुत किया गया। इसमें माता के सपनों के वे सभी 16 शुभ चिन्ह् प्रदर्शित किए गए जो जैन धर्म में शुभ माने जाते है।

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