भारत के संविधान की मूल प्रति देखना है तो आइए ग्वालियर सेंट्रल लाइब्रेरी

देश के अलग अलग हिस्सों में संविधान की कुल 32 मूल प्रतियां भेजी गईं थीं, जिसमें से एक मूल प्रति ग्‍वालियर 31 मार्च 1956 को आई थी।    

द ग्‍वालियर। भारत के संविधान (Constitution of india) के बारे में सब नें सुना है, लेकिन कम ही लोग होंगे जिन्‍हें संविधान की मूल प्रति को देखने और समझने का मौका मिला होगा। यदि आपके मन में भी इस संविधान की किताब को देखने की उत्सुकता है तो आपको ग्वालियर की केंद्रीय पुस्तकालय (Gwalior Central Library) में आना होगा। यह अनमोल प्रति यहां सुरक्षित है।

भारत के संविधान की प्रति 31 मार्च 1956 को ग्‍वालियर लाई गई थी। उस वक्त देश के अलग अलग हिस्सों में संविधान की कुल 32 मूल प्रतियां भेजी जा रही थी। ग्वालियर मध्य प्रदेश के उन इकलौते शहरों में था जहां इस मूल प्रति को भेजा गया। संविधान की मूल प्रति ग्वालियर सेंट्रल लाइब्रेरी की शान में चार चांद लगा रही है।

संविधान की यह प्रति कई मायनों में खास है। इसके आवरण पृष्ठ पर स्वर्ण अक्षर अंकित हैं। प्रति के कुल 231 पेज हैं और इसमें संविधान के अनुच्छेद 344 से लेकर 351 तक उल्लिखित हैं। इतना ही नहीं संविधान सभा के 285 सदस्यों के मूल हस्ताक्षर भी इस प्रति में मौजूद हैं। इनमें बाबा साहब भीमराव अंबेडकर से लेकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद और फिरोज गांधी तक शामिल हैं। मूल प्रति में दर्ज हर अनुच्छेद की शुरुआत में प्रतीकात्मक एक विशेष चित्र प्रकाशित किया गया है।

अगर हम भारतीय संविधान के निर्माण पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि संविधान निर्माण के लिए 29 अगस्त 1947 को ड्राफ्टिंग का गठन हुआ और लगभग दो साल बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान पूर्ण रूप से तैयार हो गया। संविधान के निर्माण में कुल 284 सदस्यों का सहयोग रहा। संसदीय समिति ने इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया। उस समय इसकी मूल प्रतियां बनाई गई थी, जिनमें से एक प्रति आज भी ग्वालियर की सेन्ट्रल लाइब्रेरी में रखी हुई है।

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