जमीन के फर्जीवाड़ा मामले में यश गोयल समेत शासन को हाईकोर्ट का नोटिस

महलगांव की 200 करोड़ रुपए से अधिक की 30 बीघा जमीन का मामला। सन 1970 में थी सरकारी, फर्जीवाड़ा कर हो गई निजी।

राजेंद्र तलेगांवकर, द ग्वालियर। मध्‍य प्रदेश उच्‍च न्‍यायालय खंडपीठ ग्‍वालियर (MP High Court Bench Gwalior) ने सिटी सेंटर (City Center Gwalior) महलगांव की लगभग 30 बीघा सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से निजी करा कर बेचे जाने के मामले में प्रस्तुत की गई जनहित याचिका पर शासन को नोटिस जारी किए हैं।

न्यायमूर्ति शील नागू एवं न्यायमूर्ति राजीव कुमार श्रीवास्तव की युगलपीठ ने अंकित वशिष्ठ की जनहित याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन, संभागीय आयुक्त ग्वालियर, कलेक्टर ग्वालियर, आयुक्त भू-अभिलेख एवं यश गोयल को नोटिस जारी किए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।

याचिका में कहा गया है कि महलगांव में स्थित जमीन 1970 में शासकीय जमीन के रूप में दर्ज थी। कुछ जमीन मंदिर के नाम दर्ज थी। इस सरकारी जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर इसे निजी घोषित करा दिया गया। बाद में हरिशंकर गोयल ने यह जमीन सुरेश के नाम ट्रांसफर कर दी। उसके बाद इस जमीन पर प्लॉट एवं भवन बनाकर उसे बेच दिया गया। वर्तमान में इस जमीन की कीमत 200 करोड़ रुपए से अधिक बताई जाती है।

याचिका में कहा गया कि फर्जीवाड़ा करते हुए यह जमीन सुरेश गोयल एवं यश गोयल के नाम कर दी गई। न्यायालय ने इस मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए शासन को नोटिस जारी कर दिया है।

सिटी सेंटर की जमीन को लेकर हुए हैं कई घोटाले

सिटी सेंटर क्षेत्र में सरकारी जमीन को लेकर कई घोटाले हुए हैं। नए जिला न्यायालय भवन एवं कलेक्ट्रेट के सामने स्थित जमीन का मामला इस समय हाईकोर्ट में लंबित है। इसी तरह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिरोल में पत्रकार कॉलोनी की जमीन को राधेलाल के नाम किए जाने का मामला भी हाईकोर्ट में लंबित है। इस मामले में भी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद भी पुलिस ने 2 साल बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की। मुख्य आरोपी राधेलाल के घर का पता भी पुलिस नहीं लगा सकी है, जबकि राधेलाल की ओर से सिविल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक जितने भी शपथ पत्र प्रस्तुत किए गए सभी में उसकी उम्र में काफी अंतर था।

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