स्पष्टीकरण देने के लिए ग्वालियर एसपी हाईकोर्ट में तलब

पुलिस द्वारा याचिकाकर्ता अरुण शर्मा को इनामी बदमाश बताकर गिरफ्तार करने एवं उसके फोटो मीडिया में प्रकाशित कराने के मामले को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना है।

द ग्वालियर। मध्‍य प्रदेश उच्‍च न्‍यायालय खंडपीठ ग्‍वालियर (Madhya Pradesh High Court Bench Gwalior) ने पुलिस द्वारा याचिकाकर्ता अरुण शर्मा को इनामी बदमाश बताकर गिरफ्तार करने एवं उसके फोटो मीडिया में प्रकाशित कराने के मामले को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना है। हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक ग्वालियर (SP Gwalior) को समस्त दस्तावेजों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होने पर उच्च न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ता को मुआवजा दिलाए जाने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अधिवक्ता को न्यायालय को सुझाव देने का आग्रह किया था। प्रकरण की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव ने इस मामले में शासन को पुनर्विचार के लिए समय दिए जाने का आग्रह किया, जिस पर न्यायालय ने 1 सप्ताह का समय देते हुए प्रकरण की सुनवाई को 9 नवंबर के लिए नियत किया।

 यह है मामला

याचिकाकर्ता द्वारा याचिका थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर एवं एक अन्य पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर प्रस्तुत की गई। याचिकाकर्ता जो कि एक दुकानदार है उस पर यह आरोप है कि वह न तो दुकान खाली कर रहा है और न किराए का भुगतान कर रहा है। वह शेष मकान पर भी अतिक्रमण कर सकता है। यह आरोप लगाते हुए उसे पुलिस के सहयोग से जबरन बाहर निकाला गया। उसके साथ मारपीट की गई दुकान का सामान थाने ले जाया गया। उसे यह तय कराया गया कि वह दुकान को खाली कर देगा। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पुलिस ने उसे 5000  का इनामी बदमाश बताते हुए अखबारों में उसकी फोटो छपवाकर उसकी प्रतिष्ठा समाप्त की गई। मामले की शिकायत होने पर एसपी द्वारा जब जांच कराई गई तो पाया गया कि याचिकाकर्ता एक निर्दोष व्यक्ति है और उसे रिहा कर दिया गया।

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