ग्वालियर नगर निगम में एक और गड़बड़ी उजागर, अपनों को दुकानें बेचने निकाल दिया ऑफलाइन टेंडर

ऑफलाइन टेंडर की आड़ में हो रहे घोटालों को रोकने के लिए सरकार ने वर्ष 2016 में नियमों को परिवर्तित कर ऑफलाइन टेंडर प्रक्रिया कर दी थी पूर्णत: प्रतिबंधित।

द ग्वालियर। सिटी प्लानर घूसकांड के बाद नगर निगम ग्‍वालियर के टेंडर सेल में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। नगर निगम के अधिकारियों ने अपने चहेतों को दुकानें आवंटित करने के लिए ऑफलाइन टेंडर जारी कर दिए, जबकि शासन ने ऑफलाइन टेंडर पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। पूरा खेल खेलने के लिए नगर निगम के अधिकारियों ने सरकार के नियम को अपने हिसाब से परिभाषित कर गड़बड़ी को अंजाम दिया है।   

ग्‍वालियर नगर निगम द्वारा कंपू स्थित पुलिस लाइन के पेट्रोल पंप के पास मार्केट का निर्माण किया गया है, जिसमें आठ दुकानें बनाई गई हैं। दुकानों का विक्रय सिर्फ ऑनलाइन टेंडर के जरिए किया जाना था, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के चलते दुकानों के विक्रय के लिए ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफ़लाइन टेंडर भी आमंत्रित कर लिया। नगर निगम के अधिकारियों के खेल का पूरा भांडा तब फूटा जब दुकान खरीदने के लिए ऑनलाइन टेंडर भरने वाले गुड़ा निवासी अनिल कुशवाह ने आपत्ति की।

शासन ने 2016 में बदल दिए नियम

ऑफलाइन टेंडर की आड़ में हो रहे घोटालों को रोकने के लिए मध्‍य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016 में  मध्य प्रदेश नगर पालिका संपत्ति अंतरण नियम 2016 के तहत ऑफलाइन टेंडर बुलाना प्रतिबंधित कर दिया था। इस नियम के तहत एक लाख से ज्यादा के कार्य अथवा संपत्ति के लिए यदि आवश्यक होगा तभी ऑफलाइन टेंडर बुलाए जा सकेंगे, लेकिन इसके लिए राज्य सरकार की अनुमति लेना आवश्‍यक होगी। इतना ही नहीं ऑफलाइन टेंडर के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाना भी आवश्‍यक होगा। पर ग्‍वालियर नगर निगम के अधिकारियों ने नियम दरकिनार कर न तो सरकार से अनुमति ली, न कलेक्‍टर की अध्‍यक्षता में कोई कमेटी बनी। फिर भी ऑफलाइन टेंडर आमंत्रित कर लिए। 

सदस्य ने लगाई आपत्ति

नगर निगम में 3 दिसंबर को टेंडर समिति की बैठक हुई थी, जिसमें समिति के सदस्य इंजीनियर अभिनव कुमार तिवारी ने दुकानें बेचने के लिए ऑफलाइन टेंडर प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति की। अभिनव कुमार तिवारी ने स्पष्ट उल्लेख किया शासन के नियमानुसर ऑफलाइन टेंडर नहीं स्वीकार किए जा सकते, इसलिए ऑफलाइन टेंडर के तहत आए आवेदनों को निरस्त किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि नगर निगम की टेंडर शाखा में पहले भी कई बार गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं। निगमायुक्त संदीप माकिन ने टेंडर सेल समिति का अध्यक्ष अपर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव को बनाया है। राजेश श्रीवास्तव पर पहले भी कई प्रकार की गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे हैं। 

अपर आयुक्‍त बोले

मध्य प्रदेश सरकार ने 2016 में नियम संशोधित कर अन्य सभी विभागों को कार्यों के लिए ऑनलाइन टेंडर अनिवार्य किया है। जहां तक संपत्ति से जुड़े मामलों का सवाल है तो सरकार के नियमों में ऑनलाइन शब्द का उल्लेख नहीं है। इसे देखते हुए दुकानों के लिए हमने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही प्रकार के टेंडर बुलाए हैं।

राजेश श्रीवास्तव, अपर आयुक्त, नगर निगम ग्‍वालियर

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