ग्वालियर नगर निगम सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा 5 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार, ईओडब्‍ल्‍यू की कार्रवाई

डुप्‍लैक्‍स बनाने की अनुमति के एवज में सिटी प्‍लानर ने मांगी थी बिल्‍डर से 50 लाख की रिश्‍वत। सिटी प्‍लानर के गिरफ्तार होते ही निगमायुक्‍त ने पद से हटाया।

द ग्वालियर। ग्वालियर नगर निगम के सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा को आर्थिक अपराध ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की ग्वालियर इकाई ने शनिवार को दोपहर 5 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। एक बिल्‍डर से डुप्‍लैक्‍स बनाने की अनुमति के बदले 50 लाख रुपए की मांग की थी, जिसकी पहली किश्‍त पहली किस्त 5 लाख रुपए लेने के दौरान निगम मुख्यालय से चंद फासले पर ही ईओडब्‍ल्‍यू की टीम ने धर-दबोचा। पकड़े जाते ही निगमायुक्त संदीप माकिन ने वर्मा को सिटी प्लानर के पद से हटा दिया। अब यह पद प्रभारी कार्यपालन यंत्री पवन सिंघल को सौंपा गया है।

ईओडब्ल्यू एसपी अमित सिंह ने बताया कि गांधी नगर निवासी धमेंद्र भारद्वाज ने नगर निगम में डुप्‍लैक्‍स निर्माण की अनुमति मांगी थी, जिसके एवज में सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा ने 50 लाख रुपए की मांग की थी। बिल्डर के कोरोना के कारण आर्थिक संकट का हवाला देने पर प्रदीप वर्मा 25 लाख रुपए  में काम करने को तैयार हो गए।

बिल्डर ने मामले की शिकायत ईओडब्ल्यू में कर दी, जिस पर संज्ञान लेते हुए एसपी अमित सिंह ने लेन-देन को लेकर प्रदीप वर्मा और बिल्‍डर के बीच की बातचीत की रिकार्डिंग एकत्रित की। रिश्‍वतखोर अधिकारी को दबोचने का प्‍लान बनाया गया। बिल्‍डर ने प्रदीप वर्मा को पहली किश्‍त के तौर पर पांच लाख रुपए देने को कहा। शनिवार को पांच लाख रुपए देने की तैयारी की गई। बिल्‍डर को रुपए देकर भेजा गया।

बिल्‍डर ने रुपए देने के लिए प्रदीप वर्मा को फोन लगाया तो उसने कार में ही रुपए लेने की बात कही। वह कार लेकर गांधी रोड, बाल भवन क्षेत्र में घूमा। ईओडब्ल्यू ने चार टीमें उसके पीछे लगा रखी थीं। बिल्डर ने कार में बैठकर 5 लाख दिए और इशारा कर दिया। इशारा मिलते ही ईओडब्ल्यू ने वर्मा को 5 लाख रुपए लेते रंगे हाथों पकड़ लिया, जिसके बाद प्रदीप वर्मा को विश्वविद्यालय थाने ले जाया गया।

विनय नगर स्थित घर भी पहुंची पुलिस

पांच लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा के विनय नगर स्थित सेक्टर-3, सौ फुटा रोड स्थित निवास पर भी ईओडब्ल्यू की टीम कार्रवाई करने पहुंच गई। वहां से काफी दस्तावेज व रकम जब्त करने की बात सामने आई है। एसपी का कहना है कि इस पूरे मामले की पड़ताल के बाद ही पता चलेगा कि वर्मा ने कितनी संपत्ति अर्जित की है।

सकते में अन्य अधिकारी, फोन बंद किए

ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई से निगम सहित अन्य विभागों में हड़कंप मच गया। निगम की भवन शाखा में पिछले 2 साल से इस प्रकार के अवैध लेन-देन के ज्यादा ही चर्चे होने लगे थे। एंटी माफिया अभियान में भी बड़े स्तर पर उगाही की शिकायत हो रही थी। निगमायुक्त संदीप माकिन के साथ ही वर्मा की शिकायत ईओडब्ल्यू व लोकायुक्त तक पहुंची थीं, लेकिन निगम प्रशासन शिकायतों के प्रति गंभीर नहीं रहा। निगमायुक्त के मौन साधने के बाद बिल्डर भारी हो गए थे।

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