ग्वालियर में किसान आंदोलनकारियों को जबरन हटाया, रात के अंधेरे में उखाड़ ले गए टेंट

टेंट उखाड़ने से नाराज आंदोलनकारी पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने सड़क पर धरने देकर बैठे। दोबारा से टेंट लगाने की मांग को लेकर अड़े।

द ग्वालियर। कृषि कानून के विरोध में फूलबाग पर पिछले 48 दिन से धरने पर बैठे आंदोलनकारियों का जिला प्रशासन ने जबरन हटा दिया। रात के अंधेरे में पुलिस के सहयोग से मदाखलत दस्ता  आंदोलनकारियों का टेंट उखाड़कर ले गया। गुस्सातए किसान संगठन और माकपा नेता शुक्रवार को सिटी सेंटर स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने सड़क पर ही धरने पर बैठे गए, जिसकी वजह से मुख्य  मार्ग पर जाम लग गया। पुलिस अधीक्षक ने आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयाय किया, लेकिन वह सड़क से हटने को तैयार हुए। बाद में ज्ञापन देकर चले गए। 

ग्वा लियर के फूलबाग चौराहे पर कृषि कानून के विरोध में किसान संगठन पिछले 48 दिन से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। रोज की तरह पुलिस बल और प्रशासन भी तैनात था। आंदोलनकारी भी अपने टेंट में सो रहे थे। गुरुवार देर रात करीब पौने 12 बजे नगर निगम का मदाखलत दस्ताल फूलबाग चौराहे पर पहुंचा और बिना किसी को सोचने-समझने का मौका दिए टेंट उखाड़ना शुरू कर दिया।

अचानक पुलिस-प्रशासन की हलचल और मदाखलत दस्ते  की कार्रवाई को आंदोलनकारी समझ पाते तब तक टेंट उखड़ना चालू हो गया। आंदोलनकारी उठकर टेंट से बाहर आए और विरोध किया, लेकिन तब तक मदाखलत दस्तात टेंट उखाड़कर वाहन में रखकर चलता बना। जिला प्रशासन को कहना था कि आंदोलनकारियों ने धरने की अनुमति नहीं ली थी। उनके पास चौराहे पर टेंट लगाने की भी अनुमति नहीं थी।

रात को ही आंदोलनकारियों ने अपने समर्थकों को पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई से अवगत करवाया। शुक्रवार को किसान संगठन और माकपा के बैनर तले आंदोलनकारी सिटी सेंटर स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर सड़क पर धरना देने बैठ गए, जिसकी वजह से मुख्य  मार्ग पर जाम लग गया। पुलिस अधीक्षक अमित सांधी भी मौके पर पहुंच गए। उन्हों ने आंदोलनकारियों को सड़क से हटने के लिए काफी समझाया, लेकिन आंदोलनकारी फिर से फूलबाग चौराहे पर टेंट लगाने की मांग को लेकर जमे रहे।

माकपा नेताओं का आरोप है कि उनका टेंट अलोकतांत्रिक तरीके से हटाया गया है। रात के अंधेरे में पुलिस, प्रशासन की दम पर मदाखलत दस्तार टेंट उखाड़कर ले गया। उन्हों ने मांग की कि रेल रोको आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए 45 साथियों को रिहा किया जाए। साथ ही फूलबाग पर उनका टेंट दोबारा लगवाया जाए। उधर, हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक अमित सांघी भी मौके पर पहुंच गए। उन्हों ने आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया कि आपने अवैधानिक तरीके से फूलबाग पर टेंट लगाया था, इसलिए उसे हटवाया गया है। इस पर माकपा नेताओं का कहना है कि हमने धरने की अनुमति के लिए बकायदा आवेदन किया था, लेकिन प्रशासन ने न तो निरस्ति किया न अनुमति दी। ऐसे में धरना अवैधानिक कैसे हो सकता है।

पुलिस अधीक्षक अमित सांधी ने कहा कि रेल रोकने के चलते गिरफ्तारी रेलवे एक्टे के तहत की गई है। उसमें जिला पुलिस को कोई रोल नहीं है। आपके टेंट भी अनुमति न होने पर जिला प्रशासन ने हटाएं हैं। ऐसे में यातायात जाम करना कोई समाधान नहीं है। इसके बाद धरने पर बैठे किसान नेता पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर चले गए।

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