श्रीमद् भागवत कथा का हर प्रसंग उत्सव से कम नहीं, जो हर बार सुनने में जीवंत ही लगता

सनातन धर्म मंदिर स्कूल परिसर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन। कलश यात्रा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।

द ग्वालियर। श्रीमद् भागवत कथा स्वयं श्रीकृष्ण स्वरूप है। ग्रंथ में भी कहा गया कि इससे बड़ी उपाधि कोई नहीं है, क्योंकि श्रीमद् भागवत कथा का हर प्रसंग उत्सव से कम नहीं है। यह उत्सव हर बार सुनने में जीवंत ही लगता है।

सनातन धर्म मंदिर स्कूल परिसर के गिरिराज तलहटी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पहले दिन मंगलवार को कृष्णचंद्र शास्त्री ठाकुर महाराज ने परमात्मा के तीन प्रकार सत, चित और आनंद के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि परमात्मा हर जगह उपस्थित है। चित का मतलब प्रकाश से है।

परमात्मा स्वयं प्रकाश है। सूर्य में जो रोशनी दिखाई देती है, वह भी मेरे प्रभु की रोशनी है। जगत को जो प्रकाश देता है वह परमात्मा है। आनंद की परिभाषा बड़ी विचित्र है। हर चीज आनंद देती है। हर जगह की कोई चीज आपको आनंद देती है, लेकिन यह जीभ का स्वाद है आनंद नहीं है। आनंद कुछ है ही नहीं, आनंद केवल परमात्मा का नाम है। आनंद केवल प्रभु है। मुख्य यजमान परीक्षित प्रेम गुप्ता, जिनेंद्र गुप्ता, लता गुप्ता ने भागवत पुराण का पूजन कर आरती की।

कलश यात्रा में उमड़ी भीड़

भागवत कथा के शुभारंभ अवसर पर निकली कलश यात्रा में श्रद्धालुओं की भीड़ थी। गाजे बाजे की धुन और भजनों पर नृत्य करते हुए श्रद्धालु पूरी तरह मस्त थे। भागवत कथा सुनने आने वाले श्रद्दालुओं की सुविधा के लिए विशाल पंडाल लगाया गया है। साथ ही कोविड नियमों का भी पालन किया जा रहा है। कलश यात्रा में कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष कैलाश चंद मित्तल, प्रधानमंत्री महेश नीखरा, संयोजक गिरराज किशोर गोयल, नरेंद्र सिंघल, रविंद्र सिंघल, विजय गुप्ता, संदीप जैन, अजय गुप्ता, गोपाल अग्रवाल, संतोष अग्रवाल आदि उपस्थित थे।

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