नाबालिग से यौन शोषण के आरोपी डॉक्टर को अदालत ने जमानत देने से किया इंकार

विशेष न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में मेडिकल एवं अन्य दस्तावेजों में दर्शायी गयी परिस्थितियों के आधार पर यौन शोषण के आरोप पर अविश्वास करने का कोई कारण नजर नहीं आता है।

राजेंद्र तलेगांवकर। ग्‍वालियर जिला एवं सत्र न्‍यायालय (Gwalior District and Sessions Court) के विशेष सत्र न्यायालय (Special Sessions Court) ने नाबालिग के यौन शोषण (Sexual abuse of a minor) के मामले में आरोपी डॉ. पवन कुमार गर्ग को जमानत देने से इंकार कर दिया है। न्यायालय ने आरोपी का जमानत आवेदन खारिज करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। समाज में बाल अपराधों की संख्या को देखते हुए आरोपी को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है ।

विशेष न्यायाधीश अर्चना सिंह ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में अभियोजन की ओर से प्रस्तुत मेडिकल एवं अन्य दस्तावेजों में दर्शायी गयी परिस्थितियों के आधार पर नाबालिग बालिका के साथ यौन शोषण के आरोप पर अविश्वास किए जाने का कोई कारण नजर नहीं आता है।

इस मामले में आरोपी डॉक्‍टर के जमानत आवेदन का अभियोजन तथा पीड़िता की ओर से विरोध करते हुए कहा गया कि चिकित्सक को समाज में ईश्वर का दर्जा प्राप्त है। जब व्यक्ति संकट में होता है तो वह अपना जीवन डॉक्टर पर भरोसा करके उसे सौंप देते हैं। ऐसे में यदि ऐसी घिनौनी घटना होती है तो इससे लोगों का डॉक्टर से विश्वास ही उठ जाएगा।

आरोपी और उस परिवार के लोग राजीनामा करने के लिए प्रलोभन और दबाव बना रहे हैं। आरोपी दवारा वैश्वासिक संबंधों का दुरुपयोग किया गया है, इसलिए वह जमानत पाने का हकदार नहीं है। लिहाजा आरोपी के जमानत आवेदन को खारिज करने का निवेदन किया गया। जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।

यह है मामला

पीड़ित बालिका और उसकी मां ने पडाव थाने जाकर एक नवंबर 2020 को इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई कि पीड़िता अपने पिता के साथ डॉक्टर के यहां दवा लेने गई थी। वह खांसी जुकाम से त्रस्त थी। आरोपी डॉक्टर ने पिता को दवा लाने भेज दिया और उसका यौन शोषण किया। पीड़िता की शिकायत पर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

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