5 साल पहले दिया था दुकान देने का आदेश, पालन नहीं होने पर हाईकोर्ट ने लगाया नगर निगम पर हर्जाना

सड़क चौड़ीकरण में हटाई गई दुकान के बदले दुकान नहीं मिली तो याचिकाकर्ता ने दूसरी बार लगाई अवमानना याचिका।

द ग्वालियर। सड़क चौड़ीकरण में हटाई गई दुकान के बदले मध्‍य प्रदेश उच्‍च न्‍यायालय खंडपीठ ग्‍वालियर (MP High Court) के आदेश के 5 साल बाद भी जब नारायण सिंह कुशवाह को दुकान नहीं मिली तो उन्हें दूसरी बार अदालत में अवमानना याचिका (Contempt petition) प्रस्तुत करनी पड़ी, जिस पर न्यायालय ने आदेश के पालन में विलंब पर ग्‍वालियर नगर निगम (Gwalior Municipal Corporation) पर 5 हज़ार रुपए का हर्जाना लगाया है।

न्यायमूर्ति शील नागू ने एडवोकेट सीआर रोमन एवं एडवोकेट आनंद राव मांढरे के माध्यम से प्रस्तुत अवमानना याचिका पर वीडीओ कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई करते हुए आदेश दिए हैं। निगम को यह राशि 15 दिन में जमा करना होगी।

यह है मामला

महाड़िक की गोठ निवासी नारायण सिंह कुशवाह कई वर्षों से कंपू लश्कर में नाला फुटपाट पर चाय नाश्ता की दुकान चलाता था। जिस स्थान पर वह गुमटी लगाता था वह स्थान सड़क चौड़ीकरण में चला गया। कुशवाह द्वारा नगर निगम को किराया दिया जाता था। सड़क चौड़ीकरण में गुमटी चले जाने के बाद उसने आयुक्त को कई आवेदन दिए। आवेदनों पर विचार न होने पर उसके द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की, जिस पर उच्च न्यायालय द्वारा 10 अगस्त 2015 को याचिका स्वीकार करते हुए निगम को 90 दिवस का समय दिया गया। पर आज दिनांक तक उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया है।

आवंटन में भी गड़बड़ी

कुशवाह को नगर निगम ने कागजों में तो दुकान का आवंटन कर दिया, लेकिन उस नंबर की दुकान अस्तित्व में ही नही थी। इस पर उसने अवमानना याचिका प्रस्तुत की।

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