कृषि कानूनों पर कांग्रेस के दुष्प्रचार के आगे मोदी सरकार ना झुकेगी, ना रुकेगीः नरेन्द्र सिंह तोमर

पहले अपनी पार्टी के घोषणा पत्र को झूठा कहें, फिर कृषि एक्ट का विरोध करें राहुल गांधी केंद्रीय मंत्री ने कहा कांग्रेस ने 2019 के घोषणा पत्र में किया था इन्हीं सुधारों का प्रावधान

द ग्वालियर। जो लोग मोदी सरकार द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, मैं उन्हें यह बता देना चाहता हूं कि मोदी सरकार साफ नीयत से काम करती है, किसी स्वार्थ या दबाव से नहीं चलती। आने वाले समय में देश आत्मनिर्भर हो सके, देश की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का सर्वाधिक योगदान हो, किसानों की माली हालत सुधरे और उनका जीवनस्तर ऊपर उठ सके, इसके लिए ये सुधारवादी कदम उठाए गए हैं। मोदी सरकार कांग्रेस के विरोध के आगे ना तो झुकेगी और ना इसके कारण रुकेगी। यह बात मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर ने मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा के दौरान कही। पहले घोषणा पत्र को गलत कहे, फिर विरोध करे कांग्रेस केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि कृषि सुधार कानूनों पर कांग्रेस जो दुष्प्रचार कर रही है उससे उसका गरीब और किसान विरोधी चेहरा देश के सामने आ गया है। यही कारण है कि देश के किसान कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी के साथ नहीं है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और उनको सम्मान वाला जीवन देने के लिए जो सुधार किए हैं, वे कांग्रेस को हजम नहीं हो रहे हैं। तोमर ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को यदि किसानों की इतनी ही चिंता है, तो वह पहले जनता के सामने अपनी पार्टी के 2019 के घोषणा पत्र को हाथ में लेकर उसमें किए गए कृषि सुधार के वायदों को झूठा कहें, और फिर विरोध करें।

तोमर ने कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार दस वर्षों के शासनकाल में कृषि सुधार के प्रावधानों का जिक्र करती, रही लेकिन उसे लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। अब जब मोदी सरकार ने इन प्रावधानों को लागू कर दिया तो कांग्रेस नेता दुष्प्रचार करने में जुट गए हैं।

कमलनाथ से लेकर शरद पंवार तक करते थे इन्हीं सुधारों की बात

तोमर ने कहा कि कांग्रेस के नेता आज जिन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, अलग-अलग मंचों पर वे इन्हीं सुधारों की बात करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि नीति आयोग के साथ सभी राज्यों ने इन सुधारों पर सहमति जताई थी। उस समय दस राज्यों के मुख्यमंत्रियों की कमेटी बनाई गई थी और उसमें मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ भी शामिल थे। कमलनाथ ने आवश्यक वस्तु अधिनियम को समाप्त करने की बात कही थी। यही नहीं स्वामीनाथन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इन तीनों सुधारों की वकालत की। शेतकारी संगठन के प्रमुख शरद जोशी ने किसानों को मंडियों के बंधन से मुक्त करने की बात कही। यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह और कृषि मंत्री रहे शरद पवार ने भी इन सुधारों पर सहमति जताई थी। कृषि मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के 10 वर्षों तक शरद पंवार हमेशा इन प्रावधानों का जिक्र करते थे, लेकिन कुछ लोगों के स्वार्थ और दबाव के चलते इन सुधारों को लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। अब मोदी सरकार ने बिना किसी दबाव के कृषि सुधार के विधेयकों को लागू कर दिया तो कांग्रेस सहित विपक्ष के नेता इन सुधारों को हजम नहीं कर पा रहे हैं।

संसद में कोई तथ्य नहीं रखे, सड़कों पर कर रहे हंगामा

तोमर ने कहा कि कांग्रेस नेता कहते हैं कि कृषि विधेयकों पर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा नहीं हुई। इस चर्चा को पूरे देश ने टेलीविजन पर देखा है। संसद के दोनों सदनों ने कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने जमकर राजनीति की, लेकिन किसी प्रावधान का विरोध तक नहीं किया। जब कांग्रेस के लोगों को लगा कि इन विधेयकों को पारित होने से नहीं रोका जा सकता, तो वे असंसदीय आचरण पर उतर आए। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस और उनके नेता राहुल गांधी आंदोलन करके विरोध कर रहे हैं, लेकिन इसमें हिंदुस्तान का आम किसान शामिल नहीं है।

तोमर ने कहा कि ट्रैक्टर पर सोफा लगाकर विरोध करने की यह शैली देश पहली बार देख रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की इस दोहरी राजनीति को देश की जनता और किसान अच्छी तरह समझ गये है और अब वे इससे भ्रमित होने वाले नहीं हैं।

नए कानूनों से समाप्त होगा बिचौलिया और इंस्पेक्टर राज

केन्द्रीय मंत्री तोमर ने बताया कि एमएसपी एक सीमित समय के लिए होती थी और जब इसके अलावा किसान फसल लेकर मंडी पहुंचता तो वहां के व्यापारी और बिचौलिए एक समूह बनाकर फसल कम दामों पर बेचने पर मजबूर करते थे। अब नए एक्ट के बाद किसान मंडी के अलावा अपनी फसल कहीं भी बेच सकता है। व्यापारी उसकी फसल खरीदने खेतों तक पहुंचेगे और अच्छे दाम देंगे। यही नहीं, मंडी के बाहर फसल बेचने पर कोई टैक्स भी नहीं देना होगा और एक्ट में प्रावधान है कि तीन दिन के भीतर व्यापारी को किसान का फसल का भुगतान करना होगा। अभी तक ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। किसानो को अंतरराज्यीय मंच उपलब्ध होगा और ई-मंडियां बनेंगी, जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और किसान बड़े शहरों में सीधे फसल बेच सकेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों को शोषण के साथ लाइसेंस और इंस्पेक्टर राज से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब की मंडियों में अभी 8 फीसदी टैक्स लगता है, जिसका भार किसानों पर ही आता है। नए प्रावधान में टैक्स फ्री व्यापार होगा।

कांट्रेक्ट खेती पर भ्रम फैला रही कांग्रेस

तोमर ने कहा कि कांट्रेक्ट खेती को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दल यह भ्रम फैला रहे हैं कि किसानों की जमीन छिन जाएगी। जबकि कानून के अनुसार जो अनुबंध होगा, वह केवल फसल तक सीमित है। फसल बुवाई के समय किसान और व्यापारी मिलकर मूल्य तय करेंगे। यदि इस मूल्य से ज्यादा कीमत पर फसल बिकती है तो भी किसान को बढ़ी हुई कीमत का कुछ हिस्सा मिलेगा। यदि फसल का नुकसान होता है तो न्यूनतम करार मूल्य किसान को मिलेगा। इस अनुबंध में जमीन से लेनदेन पूरी तरह प्रतिबंधित है। किसान को छूट है कि वह कभी भी करार से अलग हो सकता है, लेकिन कंपनी या व्यापारी को कारार का मूल्य चुकाने पर अलग होने की अनुमति होगी। विवाद का निराकरण एसडीएम कोर्ट में होगा और इसकी मियाद 30 दिन की तय की गई है। किसान की जमीन से कोई भी कंपनी या व्यापारी वसूली नहीं कर सकेगा और न ही एसडीएम किसान की जमीन से संबंधित डिक्री कर सकेगा। तोमर ने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की जरुरत तब थी, जब देश में खाद्यान्न कम था, लेकिन आज खाद्यान्न सरप्लस है। नए प्रावधान में गोदामों में ज्यादा स्टॉक रखा जा सकता है, जिससे कृत्रिम कमी और कालाबाजारी रुकेगी।

प्रदेश की सभी सीटों पर भाजपा जीतेगी

प्रदेश में होने जा रहे उपचुनाव के बारे में तोमर ने कहा कि ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों के साथ प्रदेश की सभी 28 सीटों पर भाजपा के ही प्रत्याशी जीतेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में भाजपा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हुई है। अभी हाल ही में प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में चार हजार रुपए की वृद्धि की है। अब मप्र के किसानों को दस हजार रुपए वार्षिक मिलेंगे। ग्वालियर में नूराबाद के पास इजरायल सरकार के सहयोग से हार्टीकल्चर सेंटर शुरु किया जा रहा है। इससे किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि चंबल संभाग में बनने जा रहे अटल एक्सप्रेस हाईवे से पूरे इलाके का विकास तेजी से होगा। हाईवे के आसपास जमीनों पर कौन से उद्योग लग सकें, इसकी मैपिंग की जा रही है। एक्सप्रेस वे की योजना को कमलनाथ सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी के प्रयासों से इसे फिर से जिंदा किया गया और केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने इस पर सहमति दी है।

टुकड़े-टुकड़े गैंग के सहयोगी रहे हैं राहुल गांधी

तोमर ने हाथरस मामले की चर्चा करते हुए कहा कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसे लेकर किसी को भी सामाजिक विद्वेष फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता उत्तरप्रदेश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। जिस प्रकार से हाथरस की घटना पर दंगे फैलाने की साजिश बेनकाब हुई है, उससे जनता इनकी नीयत समझ गई है और यह तो पहले से जगजाहिर है कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी शुरू से टुकड़े-टुकड़े गैंग का साथ देते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उप्र सरकार इस साजिश को सफल नहीं होने देगी।

भाजपा सरकारों को रही है किसानों की चिंता

  • अटलजी ने अपने शासनकाल में किसानो के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की शुरुआत की थी। उस समय 6 करोड़ किसान लाभार्थी थे और कर्ज की सीमा 25 हजार रुपये थी। मोदी सरकार ने इसे आगे बढ़ाया और अब किसानों को दो से पांच लाख रुपए का ऋण मिलता है। – 2014 के बाद मोदी सरकार को पूरा फोकस किसानों और ग्रामीण विकास पर ही रहा है। पहले 13वें वित्त आयोग ने किसानों को मात्र 65 हजार करोड़ रुपए गांवों के विकास के लिए दिए थे, लेकिन मोदी सरकार ने अभी तक 2 लाख 92 हजार करोड़ रुपए सीधे ग्राम पंचायतों को दिए हैं
  • हाल ही में 15वें वित्त आयोग ने एक वर्ष में 65 हजार करोड़ रुपए ग्रामीण विकास के लिए दिए जाने की अनुशंसा की है, इसे सरकार ने स्वीकृति प्रदान की है।
  • गांवों में रोजगार के लिए मनरेगा में सरकार ने एक लाख, एक हजार, पांच सौ करोड़ रुपए की धनराशि दी है।
  • वर्ष 2010 में कृषि विभाग, मछली व पशुपालन का संयुक्त बजट केवल 12 हजार करोड़ रुपए था, जबकि मोदी सरकार में सिर्फ कृषि विभाग का बजट एक लाख 34 हजार करोड़ रुपए हो गया है।
  • किसानों की आय बढ़ाने के लिए स्वामीनाथन आयोग ने 201 अनुशंसाएं की थीं, जिसमें से 200 पर मोदी सरकार तेजी से काम कर रही है।
  • यूपीए सरकार ने लगात पर 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर एमएसपी तय किए जाने की अनुशंसा नहीं मानी थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे लागू किया है।
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में देश के 10 करोड़ किसानो को शामिल किया गया है और इस वर्ष 93 हजार करोड़ रुपए सीधे किसानो को दिए गए हैं।
  • देश में 86 प्रतिशत छोटे किसानों को मदद देने के लिए देश में 10 हजार एफपीओ (किसान उत्पादक संघ) की स्थापना की जा रही है। इस पर केंद्र सरकार 6868 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी।
  • एफपीओ को प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए 2 करोड़ रुपए तक का ऋण भी अलग कोष से मिलेगा और इस पर सरकार ब्याज में तीन फीसदी की सब्सिडी भी देगी।
  • दूरस्थ गांवों तक कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए सरकार ने डेढ़ लाख करोड़ रुपए के निवेश करने की योजना बनाई है, जिससे किसानों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

पत्रकार वार्ता के दौरान केंद्रीय मंत्री तोमर के साथ ग्वालियर सांसद विवेक शेजवलकर, प्रदेश मीडिया प्रमुख लोकेन्द्र पाराशर, जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी, मीडिया पैनेलिस्ट आशीष अग्रवाल एवं संभागीय मीडिया प्रभारी पवन सेन भी उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *