डॉ. सतीश सिंह सिकरवार कल कमल छोड़ कमलनाथ का हाथ थामेंगे, भोपाल रवाना

ग्वालियर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं तीन बार से पार्षद डॉ. सतीश सिंह सिकरवार कल 8 सितंबर को कमल दल छोड़कर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के समक्ष कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। ऐसा होने पर ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच जबर्दस्त चुनावी जंग होने के आसार भी बन रहे हैं। डॉ. सतीश सिंह सिकरवार अपनी टीम के साथ भोपाल के लिए सोमवार दोपहर में ही रवाना हो गए हैं। वे 8 सितंबर 2020 को कांग्रेस कार्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के समक्ष कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करेंगे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं उनकी टीम के भाजपा में शामिल होने के बाद से भाजपा और कांग्रेस दोनों में ही उथल पुथल मची हुई है। इस परिवर्तन के बाद ही माना जाने लगा था कि भाजपा के वे नेता जो सिंधिया का विरोध कर अपनी राजनीति चला रहे थे, चुप नहीं बैठेंगे। ऐसे कुछ नेताओं ने सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन अन्य माध्यमों से अपना विरोध जरूर जता दिया। ग्वालियर पूर्व में पिछले विधानसभा चुनाव में कड़ी टक्कर के बाद विधायक बने मुन्नालाल गोयल के भाजपा में आने के बाद इस क्षेत्र के भाजपा के दावेदारों परेशान हो गए। डॉ. सतीश सिंह सिकरवार को लेकर यह चर्चाएं शुरू हो गई थीं कि वे कांग्रेस में जा सकते हैं। कांग्रेस को भी मुन्नालाल को टक्कर देने के लिए दमदार प्रत्याशी की जरूरत थी, इसलिए दोनों ही ओर से प्रयास के बाद डॉ. सतीश सिंह का कांग्रेस में जाना लगभग तय हो गया है।

अगर कोरोना काल नहीं होता तो डॉ. सतीश सिंह का कांग्रेस में आने पर बहुत बड़ा जलसा होना तय था। कोराना काल में लॉकडाउन के दौरान सतीश सिंह सिकरवार ने जिस प्रकार लोगों के लिए खाने का इंतजान और अनाज देने का अभियान स्तर पर काम किया उससे उनके साथ एक बड़ी टीम साथ में आ गई है। वहीं, मुन्नालाल गोयल ने भी इस दौरान अपने लोगों से संपर्क बनाकर यह बताने की कोशिश की कि वे अभी भी मजबूत हैं। डॉ. सतीश सिंह के कांग्रेस में आने से पहले ही कांग्रेस में कुछ नेताओं ने उनका विरोध भी किया है। विरोध करने वाले इस क्षेत्र से अपना दावा जता रहे थे। डॉ. सतीश के कांग्रेस में आने से ग्वालियर पूर्व में होने वाले चुनाव पर सभी की नजर रहेगी। यह चुनाव कांग्रेस खोई हुई सत्ता प्राप्त करने के लिए लड़ेगी, जबकि भाजपा अपनी सरकार को बचाए रखने के लिए मैदान में उतरेगी।

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