Home लीगल उच्‍च न्‍यायालय ने तथ्य छुपाए जाने पर वकील पर लगाया 20000 का हर्जाना

उच्‍च न्‍यायालय ने तथ्य छुपाए जाने पर वकील पर लगाया 20000 का हर्जाना

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न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जीएस शर्मा ने इस मामले में न्यायालय के साथ जो व्यवहार किया है वह निंदनीय है।

द ग्वालियर। हाईकोर्ट में संविदा शिक्षक श्रेणी 3 की नियुक्ति के मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को चेतावनी देते हुए उन पर 20000 रुपए का हर्जाना लगाया है। अधिवक्ता जी एस शर्मा को यह राशि 2 सप्ताह में जमा करनी होगी। न्यायमूर्ति जी एस अहलूवालिया ने रामअवतार गौड एवं अन्य की याचिका को खारिज करते हुए कहां की याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जी एस शर्मा ने इस मामले में न्यायालय के साथ जो व्यवहार किया है वह निंदनीय है। न्यायालय ने यह भी कहा के अधिवक्ता न्यायालय का अधिकारी होता है, इसलिए उनसे यह उम्मीद की जाती है कि वह न्यायालय के समक्ष सही तथ्य रखें लेकिन हेलो के शर्मा ने जो तरीका अपनाया वह उचित नहीं है। उनका तरीका न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है लेकिन न्यायालय उन्हें चेतावनी देना उचित समझता है।

यह है मामला

राम अवतार एवं अन्य द्वारा यह याचिका इस निवेदन के साथ प्रस्तुत की गई है के संविदा शिक्षक 3 के पदों पर नियुक्त अन्य शिक्षकों की तरह है उनके अभ्यावेदन पर विचार के लिए शासन को निर्देश दिए जाएं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा ऐसे ही मामले में न्यायालय के पूर्व आदेश होगा जिक्र नहीं किया गया। इस मामले में तथ्यों को छुपाकर अपने पक्ष में अनुकूल आदेश प्राप्त करने का प्रयास किया गया। याचिकाकर्ताओं द्वारा वर्ष 2011 में संविदा शाला शिक्षक ग्रेड 3 की परीक्षा दी थी। उनके द्वारा भारतीय शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश से डीएड करने के प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए। जो कि यहां मान्य नहीं थे।

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