Home लीगल हाईकोर्ट के आदेश पर दो पुलिस अधिकारी व एक आरक्षक के खिलाफ विभागीय जांच शुरू

हाईकोर्ट के आदेश पर दो पुलिस अधिकारी व एक आरक्षक के खिलाफ विभागीय जांच शुरू

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याचिकाकर्ता को इनामी घोषित कर किया था गिरफ्तार। हाईकोर्ट ने राज्‍य शासन से मांगा था जवाब। शासन ने जवाब में विभागीय जांच की बात कही।

राजेंद्र तलेगांवकर, द ग्वालियर। मध्‍य प्रदेश उच्‍च न्‍यायालय खंडपीठ ग्‍वालियर (MP High Court Bench Gwalior) के आदेश के बाद पुलिस प्रशासन (MP Police) ने किराएदार अरुण शर्मा से जबरन दुकान खाली कराकर उसके साथ मारपीट कर दुकान से सामान भरकर ले जाने के मामले में उप निरीक्षक दिनेश राजपूत, उप निरीक्षक संजीता मिंज एवं आरक्षक अचल शर्मा के खिलाफ संयुक्त विभागीय जांच (Departmental inquiry) प्रारंभ की है।

राज्य शासन (State Government)  ने हाईकोर्ट के निर्देश पर इस संबंध में जवाब प्रस्तुत करते हुए उक्त जानकारी दी है। जवाब में कहा गया है कि आरोपीगण के दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी। उल्लेखनीय है कि उप निरीक्षक दिनेश सिंह राजपूत को विभाग द्वारा इस मामले में 5000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया जा चुका है। याचिकाकर्ता अरुण शर्मा के साथ 25 जुलाई 2020 को मकान मालिक विपिन आर्य तथा अन्य लोगों द्वारा मारपीट कर उसकी दुकान सामान भरकर ले जाने के तथ्य प्रमाणित पाए जाने पर दो उप निरीक्षक तथा एक आरक्षक को आरोप पत्र दिए गए हैं। तीनों को पहले ही लाइन अटैच किया जा चुका है।

पूर्व में हाईकोर्ट यह दे चुका है आदेश

इस मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि वे तत्काल सभी पुलिस अधीक्षकों को यह दिशा-निर्देश जारी करें कि किसी भी परिस्थिति में आरोपी का मीडिया में खुलासा नहीं किया जाए। आरोपी के फोटो का प्रकाशन एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रसारण नहीं किया जा सकेगा। संदिग्ध आरोपियों की पहचान का खुलासा न्यूज़पेपर या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करना व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन है।

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