Home धर्म-ज्योतिष परमात्मा प्राप्ति के लिए भीतर शांति लाना बहुत आवश्यक, तनाव से परमात्मा नहीं मिल सकता : प्रतीक

परमात्मा प्राप्ति के लिए भीतर शांति लाना बहुत आवश्यक, तनाव से परमात्मा नहीं मिल सकता : प्रतीक

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सोनागिर स्थित आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में आयोजित हुई धर्म सभा। प्रतीक सागर महाराज बोले, क्षमा के भाव से भीतर शान्ति, प्रेम, तृप्ति आती है।

द ग्वालियर। क्रोध जड़ पर नहीं चेतन पर आता है। हम हमेशा किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा परिस्थिति के वश होकर क्रोध करते हैं। क्षमा के भाव से भीतर शान्ति, प्रेम, तृप्ति आती है। परमात्मा, शान्ति, आनंद, प्रेम कहीं दूर नहीं, तुम्हारे ही पास है। परमात्मा मन्दिर, मस्जिद में हो भी सकता है और नहीं भी, परंतु वह तुम्हारे अन्तर्मन में विराजमान है। परमात्मा तुम्हें इसी क्षण मिल सकता है। आवश्यकता है केवल देखने की। तनाव से परमात्मा नहीं मिल सकता। परमात्मा प्राप्ति के लिए भीतर शांति लाना बहुत आवश्यक है। यह बात प्रतीक सागर महाराज ने बुधवार को सोनागिर स्थित आचार्य श्री पुष्पदंत सागर सभागृह में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही।

मुनिश्री ने कहा कि जब तक व्यक्ति का हृदय प्रेम से पूर्ण नहीं है तब तक साधना नहीं हो सकती । साधना में लीन हो जाओ। मानव बन जाओ, सेवा करो, भक्ति करो। सारे झगड़े परमात्मा को सौंप दो। आप केवल शरण-भाव से जीना सीख लो। परमात्मा अपने आप आपके पास पहुंच जाएगा।

प्रेम को जितना बांटोगे उतना तुम्हें मिलेगा

मुनिश्री ने कहा कि भीतर प्रेम को लुटाओ। प्रेम को जितना बांटोगे उतना तुम्हें मिलता जाएगा। फूल की भांति सुगंध बांटो, पानी बांटो। सूरज जिस प्रकार सबको प्रकाश देता है, उसी प्रकार सबको प्रकाश दो। श्रद्धा को मूल्य देने से शांति आती है। मुनिश्री ने कहा कि प्रतिदिन प्रभु की भक्ति करो, उनकी लौ भीतर जला लो, हर तरफ प्रकाश ही प्रकाश होगा।

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