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यौन शोषण के आरोपी के बचाव में उतरे शहर के सम्मानित डॉक्टर

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शहर के एक डॉक्‍टर पर लगा है नाबालिग के साथ परीक्षण के दौरान यौन शोषण (Sexual Exploitation) करने का आरोप। बच्‍ची की शिकायत के बाद पुलिस ने किया है मुकदमा दर्ज।

द ग्‍वालियर। इंसानी दुनिया में डॉक्‍टर (Doctor) भगवान से बढ़कर हैं। कोरोना काल में डॉक्‍टर्स इंसानी जिंदगी को बचाने में जिस शिद्दत से जुटे हैं उसे देख हर कोई उन्‍हें सलाम करता है। पर कुछ डॉक्‍टर ऐसे भी हैं, जो अपने पेशे का गलत फायदा उठाकर घिनौनी हरकत से बाज नहीं आते।

ताजा मामला ग्‍वालियर का है। जहां एक उम्र दराज डॉक्‍टर पर एक नाबालिग के साथ डॉक्‍टरी परीक्षण के नाम पर यौन शोषण का आरोप लगा है। मामला जब खुला तो पुलिस ने नाबालिग लड़की की शिकायत पर डॉक्‍टर के खिलाफ पोक्‍सो एक्‍ट (Pocso Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया।

हैरानी की बात यह है कि डॉक्‍टर की इस करतूत के सामने आने के बाद भी शहर के कुछ सम्मानित डॉक्‍टरों की संस्‍थाओं को यह सब गलत लग रहा है। इतना ही नहीं कानूनी चौखट पर आ चुके इस मामले को लेकर डॉक्‍टरों की संस्‍थाओं ने यौन शोषण करने वाले डॉक्‍टर के सर्मथन में बैठक कर पूरी कार्रवाई को न सिर्फ गलत बता दिया, बल्कि नाबालिग द्वारा लगाए गए आरोपों को गलतफहमी बताया। सबसे ज्‍यादा हैरान करने वाली बात यह है कि यौन शोषण के आरोपी डॉक्‍टर के सर्मथन में हुई बड़े-बड़े डॉक्‍टरों के संगठन प्रतिनिधियों की यह बैठक अंचल के सबसे बड़े ज्‍यारोग्‍य अस्‍पताल परिसर में की गई।

अरोपी डॉक्‍टर को बचाने जुटे यह संगठन

यौन शोषण के आरोपी डॉक्‍टर को बचाने के लिए आज गुरूवार को जयारोग्‍य अस्‍पताल परिसर में इंडियन मेडीकल एसोसिएशन, मेडीकल टीचर्स एसोसिएशन गजराराजा चिकित्‍सा महाविद्यालय, मेडिकल ऑ‍फीसर एसोसिएशन, इंडियन डेंटल एसोसिएशन और नर्सिंग एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बैठक की। आईएमए ग्‍वालियर अध्‍यक्ष डॉ. प्रदीप राठौर और सचिव डॉ. सुनील शर्मा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक बैठक में डॉ. एएस भल्‍ला, डॉ. मजूमदार, डॉ. मुकुल तिवारी, डेंटल एसोसिएशन से डॉ. आलोक पुरोहित, एमटीए से डॉ. सुनील अग्रवाल, डॉ. अखिलेश त्रिवेदी, डॉ. मनोज बंसल, डॉ. हरि सिंह, और नर्सिंग एसोसिएशन की तरफ से सुश्री रेखा परमार, ज्‍योति शर्मा, हृदेश, कल्‍पना और आईएमए के सदस्‍य शामिल हुए।

द ग्‍वालियर के सवाल

1. सम्मानित डॉक्‍टरों की बैठक में कहा गया है कि जिस आरोपी डॉक्‍टर पर यौन शोषण का आरोप है वह गलत है। डॉक्‍टर ने नाबालिग का जो इलाज के लिए परीक्षण किया वह आवश्‍यक था। अब सवाल ये कि नाबालिग सांस की परेशानी से ग्रसित थी। मेडिकल की किस पढ़ाई में सांस के मरीज का उपचार कपड़ों के अंदर हाथ डालकर किया जाता है ?

2. अस्‍थमा व सांस के मरीज को लिटाकर उसका परीक्षण नहीं किया जाता है, क्‍योंकि ऐसा करने पर मरीज की और भी ज्‍यादा परेशानी बढ़ जाती है। बावजूद इसके नाबालिग के साथ ऐसा किया गया। सवाल ये कि इस तरह का परीक्षण किस ग्राउंड पर आरोपी डॉक्‍टर द्वारा किया गया।

3. सबसे बडा सवाल यह कि ऐसी क्‍या इमरजेंसी थी कि पिता की गैरमौजूदगी में इस तरह का परीक्षण आरोपी डॉक्‍टर द्वारा नाबालिग के साथ किया गया।

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