अगर जांच सीबीआई को सौंपी तो यह पुलिस के लिए शर्मिंदगी का कारण होगा : हाईकोर्ट

ग्वालियर। शहर में 32 साल पहले हुए डबल मर्डर एवं डकैती में जब्त 80 लाख के सोने चांदी के जेवर मालखाने से गायब होने के मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट ने एसआईटी को जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट एक माह में प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि अगर पुलिस इसमें असफल रहती है तो यह मामला सीबीआई को सौंप दिया जाएगा, जोकि पुलिस के लिए शर्मिंदगी का कारण होगा।

न्यायमूर्ति शील नागू ने इस मामले में महाधिवक्ता पुरूषेन्द्र कौरव एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी से शासन का पक्ष सुनने के बाद कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा जो चिंता व्यक्त की गई है वह वास्तविक और समझने योग्य है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस की जांच जिस प्रकार से लचर और कमजोर रही है वह चिंताजनक है। शासन की ओर से कहा गया कि इस मामले में गठित एसआईटी में कुछ और पुलिस अधिकारियों को शामिल किया जाना है, इसलिए चार सप्ताह का समय और दिया जाए। न्यायालय ने कहा कि तीन साल से अधिक का समय इसकी जांच में बीत चुका है, लेकिन अभी तक कोई प्रगति जांच में नजर नहीं आ रही है।

इस मामले में याचिकाकर्ता रूचि अग्रवाल एवं अन्य की ओर से एडवोकेट आरके सोनी एवं अभिषेक बिंदल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पुलिस इस मामले में लगातार समय लेती जा रही है। इस बात का पता नहीं लगाया जा रहा है कि आखिर मालखाने से 80 लाख के जेवर कहां गायब हुए और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। न्यायालय ने कहा कि इस मामले में पुलिस की लापरवाही स्पष्ट नजर आ रही है। मामले में अब अक्टूबर के पहले सप्ताह में सुनवाई होगी।

यह है मामला उपनगर ग्वालियर में 16 मई 1988 को रमेश चन्द्र गोयल के यहां डकैती पड़ी थी। जिसमें डकैतों ने रमेशचन्द्र गोयल और उनकी पत्नी बसंती देवी की हत्या कर दी थी। डकैत रमेश चन्द्र गोयल के घर से 80 लाख रूपए कीमत के जेवर लूट ले गए थे। ये जेवर पुलिस ने बरामद करने के बाद उन्हें न्यायालय के आदेश पर मालखाने में जमा करा दिया था। मालखाने में जमा जेवर गायब हो चुके हैं, जिसकी जांच चल रही है।

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