स्वच्छ हाथों से नहीं आए अदालत में, ग्वालियर उच्च न्यायालय ने लगाया 25000 का हर्जाना

डफरिन सराय की 5 दुकानों के विवाद को लेकर मैसर्स फ्रेंड्स बिल्डर के प्रोपराइटर केशव सिंघल द्वारा प्रस्तुत की गई थी। याचिका हर्जाने की राशि अदालत परिसर में कोविड-19 की रोकथाम पर खर्च होगी।

ग्वालियर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर (Madhya Pradesh High Court Bench Gwalior) ने डफरिन सराय की 5 दुकानों के विवाद को लेकर मैसर्स फ्रेंड्स बिल्डर के प्रोपराइटर केशव सिंघल द्वारा प्रस्तुत याचिका को खारिज करते हुए ₹25000 रूपए का हर्जाना लगाया है। हर्जाने की राशि हाईकोर्ट परिसर में कोविड-19 (Covid-19) की रोकथाम के लिए खर्च की जाएगी।

न्यायमूर्ति शील नागू एवं न्यायमूर्ति राजीव कुमार श्रीवास्तव की युगलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता स्वच्छ हाथों से न्यायालय नहीं आया है। याचिकाकर्ता ने तथ्यों को छुपाते हुए याचिका प्रस्तुत की है, जिस कारण याचिका को खारिज किए जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। दरअसल, याचिकाकर्ता द्वारा इससे पूर्व यहां की 5 दुकानों के ताले खोले जाने तथा अन्य मांगों को लेकर याचिका प्रस्तुत की थी। न्यायालय में यह याचिका अभी लंबित है। इन्हीं दुकानों को लेकर पूर्व की याचिका का हवाला दिए बिना यह याचिका प्रस्तुत की गई है। जिसमें दुकानों की नीलामी को लेकर विज्ञापन पर रोक लगाने तथा अन्य दिशा-निर्देश निगम को दिए जाने की मांग की गई थी। याचिका में इन दुकानों के ताले खोले जाने के निर्देश निगम को दिए जाने का निवेदन किया गया था। यह पांच दुकान बीओटी के आधार पर बनाई गई हैं।

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