सिधिंया के प्रयासों से विनाशकारी सरकार गई और कल्याणकारी राज मप्र में आयाः पाराशर

द ग्वालियर/डबरा। जिन लोगों ने पूरे जीवन में खरीदने और बेचने के अलावा कोई काम नहीं किया। वल्लभ भवन को दलालों का अड्डा बना दिया, जहां बिना वजन के कोई ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं होती और न ही फाइल सरकती थी, वे ही ऐसी बातें कर सकते हैं। कमलनाथ जी मप्र में केवल एक थैला लेकर आए थे और कहां से आए, यह रहस्य है और बड़े उद्योगपति व व्यापारी बन गए। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने कमलनाथ जी जनता के काम करने को कहा तो अनसुनी कर दी। सिंधिया ने सड़क पर उतरने की चेतावनी दी तो कमलनाथ ने अंहकार में कहा उतर जाओ। सिंधिया जी के प्रयासों से मप्र में विशानकारी सरकार गई और एक कल्याणकारी राज की स्थापना हो गई।

यह कहना है प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेन्द्र पाराशर का। पाराशर गुरुवार को डबरा विधानसभा क्षेत्र में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उनके साथ ग्रामीण जिलाध्यक्ष कौशल शर्मा, वरिष्ठ नेता मोहन सिंह राठौड़ भी उपस्थित थे। प्रदेश मीडिया प्रभारी पाराशर ने कहा कि जिन लोगों ने खरीदा-बेचा है, वे ही बिकाऊ-टिकाऊ की बातें कर सकते हैं। कमलनाथ जी के मुख्यमंत्री रहते हुए वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बन गया था। उनके दफ्तर के बाहर बैठकर ट्रांसफर, पोस्टिंग तय होती थी और हर फाइल बिना वजन के आगे नहीं बढ़ती थी। यदि वे जनता के हित में काम करते तो पूरे पांच वर्ष उनकी सरकार चलती। कमलनाथ जी की सरकार मप्र के इतिहास में ऐसी पहली सरकार थी, जिसने जनता को लिखित में धोखा दिया। वचन पत्र में लिखी गई बातों से मुकर गए। दस दिन में किसानों का दो लाख रुपए का कर्जा माफ करने की बात कही, लेकिन सरकार बनी तो पात्रता में कमियां निकाल दीं। उनके नेता तो दस दिन में कर्जा माफ नहीं होने पर मुख्यमंत्री बदलने की बात कही थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बेरोजगारों को 4 हजार रुपए महीने भत्ता और हर पंचायत में गौशाला बनाने की बात कही। बेटियों के विवाह में 51 हजार रुपए केवल कागजों पर दिए। कांग्रेस ने बेटा-बेटी, किसान और गौमाता से धोखा दिया और केवल खरीद-फरोख्त करते रहे। उनके ही मंत्री रहे उमर सिंगार ने प्रदेश में कांग्रेस के शासनकाल में रेत और खनन माफिया की पोल खोल दी। लुटेरों की इस सरकार को तो जाना ही था।

सिंधिया जी के प्रयासों से प्रदेश में कांग्रेस का विनाशकारी शासन समाप्त हुआ पाराशर ने कहा कि जब ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने कमलनाथ जी को उनके वादों और वचनपत्र की याद दिलाई और विकास कार्य करने को कहा था, उनकी बात नहीं सुनी गई। जब सिंधिया ने काम नहीं होने पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी तो कमलनाथ जी ने अंहकार में कहा उतर जाओ। सिंधिया ने जनता के मुद्दों पर ही कमलनाथ जी की विनाशकारी सरकार को हटा दिया और अब प्रदेश में कल्याणकारी शासन है। उनकी आवाज पर विधायकों और मंत्रियों ने कुर्सी छोड़ दी। अब कांग्रेसी आरोप लगाते हैं, वे बिक गए, लेकिन कोई मंत्री या विधायक पैसे के लिए कुर्सी छोड़ता है क्या। यदि कांग्रेस को लगता है कि विधायक बिके हैं तो जांच क्यों नहीं कराई। उनकी तो उस समय सरकार थी। खरीद-फरोख्त करने वालों को हमेशा यही दिखाई देता है।

राहुल गांधी ने अपने नेताओं की बात भी नहीं सुनी

भाजपा ने ही किसानों को फसलों की एमएसपी बढ़ाकर दी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया। कांग्रेस केवल इस आयोग के बारे में कहती रही,लेकिन अमल नहीं किया। कृषि विधेयक का कांग्रेस ने विरोध किया, लेकिन उनके ही मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इन सुधारों का समर्थन करके लागू करने की बात कही थी। इनको ही उनके नेता राहुल गांधी ने इन मुख्यमंत्रियों की सलाह पढ़ ली होती, लेकिन पढ़ते-लिखते ही नहीं है। अब नए कृषि कानूनों से डबरा जैसे छोटे कस्बों और गांवों का तेजी से विकास होगा।

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