पात्र बनने पर जम्मू-कश्मीर के 5 छात्रों को पीएचडी की उपाधि देने का आदेश

जीवाजी विश्वविद्यालय में पांचों छात्रों की पीएचडी को कर दिया था रद्द, जिसके खिलाफ छात्रों ने ग्वालियर हाईकोर्ट में की याचिका पेश

द ग्वालियर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर (Madhya Pradesh High Court Bench Gwalior) ने जीवाजी विश्वविद्यालय (Jiwaji University) को आदेश दिया है कि जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के 5 छात्रों को पात्रता होने पर पीएचडी (PHD) की उपाधि प्रदान की जाए। न्यायालय ने 4 माह में यह प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं। न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी एवं न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता मुदासिर गनी, ताजमुल इस्लाम मलिक, बशारत अली, साजिद अहमद भट्ट तथा हिलाल अहमद दार की याचिका का निराकरण करते हुए आदेश दिए हैं।

याचिकाकर्ता मुदासिर गनी, ताजमूल इस्लाम मलिक, बशारत अली, साजिद अहमद भट्ट तथा हिलाल अहमद दार द्वारा प्रस्तुत याचिका में कहा गया कि वह कोली, पुलवामा और जम्मू-कश्मीर के स्थाई निवासी हैं और वर्तमान में ग्वालियर में रहते हैं। उन्होंने पीएचडी में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उन्हें पीएचडी में प्रवेश दिया गया। 27 जून 2015 को उनका पंजीयन किया गया। उन्होंने प्रोफ़ेसर के मार्गदर्शन में अपना शोध प्रारंभ किया था। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने उन्हें अवसर दिए बिना उनके शोध को रद्द कर दिया था, जोकि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि उनके द्वारा विश्वविद्यालय में विभिन्न अभ्यावेदन प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन विश्वविद्यालय ने उनके पीएचडी कोर्स को रद्द कर दिया।

इस मामले में जीवाजी विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा झूठे हलफनामे दाखिल किए गए थे। इस कारण उनके पंजीयन निरस्त किए गए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे पीएचडी के हकदार हैं। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालय ने गलत तरीके से उनका पंजीयन निरस्त किया है।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में सक्षम प्राधिकारी याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर देते हुए उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के आधार पर उनके अभ्यावेदनो का निराकरण करें। दस्तावेजों के आधार पर यदि यह पाया जाता है कि वे पीएचडी कोर्स के लिए पात्र हैं तो उन्हें उपाधि प्रदान की जाए।

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