एट्रोसिटीज व पॉक्सो एक्ट में हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : शर्तों का उल्लंघन करने पर न्यायालय आरोपी की जमानत ले सकता हैं वापस

बलात्कार पीड़िता की मां ने आरोपी कि जमानत खारिज करने को लेकर लगाई थी याचिका। कहा, आरोपी ने सशर्त जमानत का उल्लंघन किया।

द ग्वालियर। उच्च न्यायालय ग्वालियर (Madhya Pradesh High Court Bench Gwalior) ने एट्रोसिटी एवं पॉक्सो एक्ट के तहत दी गई जमानत की शर्तों का आरोपी जब उल्लंघन करता है तो न्यायालय उसे दी गई जमानत वापस ले सकता है। हाईकोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी के जमानत को खारिज तो नहीं किया, लेकिन इस मामले को विशेष न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया।

न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने बलात्कार पीड़िता की मां द्वारा प्रस्तुत याचिका की सुनवाई करते हुए आदेश दिए हैं। पीड़िता की मां द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत कर कहा गया कि आरोपी को न्यायालय द्वारा सशर्त जमानत पर रिहा किया गया था। आरोपी ने जेल से छूटने के बाद उस पर लगाई गई शर्तों का पालन नहीं किया। आरोपी पीड़िता को ही भगा कर ले गया। याचिका में आरोपी द्वारा शर्तों का उल्लंघन करने पर उसके जमानत को निरस्त करने की मांग की गई। इस मामले में आरोपी के अधिवक्ता गौरव मिश्रा का कहना था कि न्यायालय आरोपी को जमानत दे सकता है, लेकिन दी गई जमानत को वापस नहीं ले सकता। गौरव मिश्रा के द्वारा दी गई चुनौती पर हाईकोर्ट ने कानूनी बिंदु तय करने के लिए तीन न्याय मित्रों को नियुक्त किया। न्याय मित्र विजय दत्त शर्मा, अतुल गुप्ता और समीर कुमार श्रीवास्तव की राय आने के बाद न्यायालय ने उक्त फैसला सुनाया है। न्यायालय को यह भी बताया गया कि पीड़िता अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी। वह मां के पास नहीं रहना चाहती थी। याचिकाकर्ता के घर की स्थितियों से पीड़िता नाराज थी। इस कारण वह घर छोड़कर चली गई थी। न्यायालय ने यह पाया कि आरोपी ने शर्तों का उल्लंघन नहीं किया है।

जनसेवा का आदेश दे सकता है न्यायालय

इस मामले में न्यायालय ने इस बिंदु को भी स्पष्ट किया कि न्यायालय किसी आरोपी को जमानत देने के साथ सीआरपीसी के तहत अतिरिक्त शर्त लगा सकता है। आरोपी द्वारा जिला अस्पताल में सेवा कार्य किया था।

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