दो पूर्व साडा सीईओ तथा तीन कार्यपालन यंत्री सहित छ: और के खिलाफ चलेगा भ्रष्टाचार का मुकदमा

विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) में मोतीझील से तिघरा तक छः लेन सड़क बनाने में हुए भ्रष्टाचार में किया गया था 4 गुना अधिक भुगतान

द ग्वालियर। विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) में मोतीझील से तिघरा तक बनाई गई सिक्स लेन सड़क एवं पुरानी तीन लेन सड़क की मरम्मत में हुए 78 लाख से अधिक के घोटाले में आरोपी तत्कालीन कार्यपालन यंत्री डीडी मिश्रा, तत्कालीन सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री माथुर, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जीएन सिंह, तत्कालीन उप यंत्री एसके श्रीवास्तव, तत्कालीन प्रभारी अधीक्षण यंत्री उमाशंकर मिश्रा, तत्कालीन प्रभारी सहायक यंत्री अनिल सिंह चौहान, तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी वीके शर्मा तथा तत्कालीन उपयंत्री अजीत कुमार जैन के खिलाफ नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने अभियोजन स्वीकृति दे दी है।

इन अधिकारियों के खिलाफ आरटीआई कार्यकर्ता राकेश सिंह कुशवाहा ने शिकायत की थी, जिस पर लोकायुक्त पुलिस ने सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तथा भादस की धारा 120 बी के तहत मामला दर्ज किया था। लोकायुक्त पुलिस ने इन अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी थी। बाद में विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार अधिनियम द्वारा प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों को देखते हुए लोकायुक्त पुलिस की क्लीन चिट को खारिज करते हुए आरोपियों के खिलाफ चालान प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे। इस मामले में डीडी मिश्रा, जीएन सिंह, सुरेंद्र श्रीवास्तव, आदित्य सिंह तोमर तथा एक अन्य अधिकारी द्वारा विशेष न्यायालय के उक्त आदेश के खिलाफ याचिका प्रस्तुत की गई थी। हाल ही में उच्च न्यायालय ने पांचों आरोपियों की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मामला हस्तक्षेप योग्य नहीं है।

यह है मामला

जिस दौरान साडा में सड़क निर्माण को लेकर यह घोटाला हुआ उस समय सभी आरोपीगण साडा में पदस्थ रहे। आरोपियों द्वारा ठेकेदार को 53 लाख रुपए की जो अधिक राशि भुगतान की गई थी वह वसूल की गई। इस मामले में विभाग द्वारा वीके शर्मा, यूएस मिश्रा, अनिल सिंह चौहान, अजीत कुमार जैन के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति जारी की गई थी। साडा में मोती झील से तिगरा तक बनाई गई छ: लेन सड़क और पुरानी सड़क के मरम्मत के लिए 6 करोड़ 28 लाख का एस्टीमेट तैयार कर टेंडर बुलाए गए थे। मैं सर्च प्रेस्टीजियस स्कोर्स प्राइवेट लिमिटेड ग्वालियर को यह ठेका दिया गया था ठेकेदार ने अधिकारियों के साथ मिलीभगत करते हुए 4 गुना अधिक राशि का भुगतान प्राप्त किया था। इस प्रकार आरोपियों ने शासन को क्षति पहुंचाई। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाते हुए संज्ञान लिए जाने के लिए अभियोजन स्वीकृति लिए जाने के निर्देश लोकायुक्त पुलिस को दिए थे, जिस पर सभी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दी गई। इस मामले में साडा के पूर्व अध्यक्ष जय सिंह कुशवाहा एवं अन्य आरोपियों के खिलाफ भी चालान पेश हो चुके हैं।

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